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एड विएस्टर्स

प्रत्येक रोलेक्स एक कहानी बयां करती है

एड विएस्टर्स इतिहास में उन मुट्ठी भर पर्वतारोहियों में से एक और एकमात्र अमरीकी हैं, जो बिना अतिरिक्त ऑक्सिजन के, दुनिया के सभी चौदह 8000-मीटर (26,000 फीट) के पर्वतों के शिखर तक पहुँच चुके हैं। 2005 में, 14वें शिखर – अन्नपूर्णा – जो दुनिया की सबसे दुर्गम चोटियों में से एक है – की चढ़ाई पूरी करने के साथ ही, विएस्टर्स को नेशनल ज्योग्राफ़िक द्वारा एडवेंचरर ऑफ द ईयर का पुरस्कार दिया गया। कुल मिला कर, ऑयस्टर परपेचुअल एक्सप्लोरर II से लैस हो कर विएस्टर्स ने, माउंट एवरेस्ट की सात चढ़ाइयों सहित 8,000 मीटर से ऊपर की ऊँचाई वाली, 21 चोटियों की चढ़ाई पूरी की है।

Every Rolex Tells a Story – Ed Viesturs

“सबसे बड़ी खुशियों में से एक तब होती है जब आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेते हैं, जब आप शिखर पर पहुँच जाते हैं और तब आपको पता लगता है कि आपने जो भी तैयारी की थी उसका प्रतिफल मिल गया। ”

सबसे बड़ी खुशियों में से एक तब होती है जब आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेते हैं, जब आप शिखर पर पहुँच जाते हैं और तब आपको पता लगता है कि आपने जो भी तैयारी की थी उसका प्रतिफल मिल गया। इसकी लत बड़ी जल्दी लगती है क्योंकि आपको वो महान अनुभूति हो चुकी है और आप उसका अनुभव दोबारा करना चाहते हैं। मैं एवरेस्ट के शिखर पर सात बार चढ़ा हूँ, और मेरा अनुभव हर बार अनूठा था। वो एक ऐसी जगह है जहाँ पर आप हमेशा के लिए रहना चाहते हैं, लेकिन आप रह नहीं सकते।

शुरुआत में मुझे लगता था पर्वतारोहण एक शौक ही रहेगा और पेशा नहीं, और अपने पहले तीन ‘आठ हज़ारी’ – एवरेस्ट, K2 और कंचनजंगा — चढ़ने के बाद, मैंने किसी तरह, दुनिया के तीन सबसे ऊँचे शिखरों का आरोहण कर लिया था। फिर मैंने सोचा, क्यों न सारे 14 पर्वतों को चढ़ने का प्रयास किया जाए, “मैं तीन कर चुका हूँ, बस 11 ही बाँकी हैं।” मैंने निर्णय लिया, और उसका नामएंडेवर 8000.

जब मैंने अपना एंडेवर प्रोजेक्ट पूरा किया, जिसमें असल में 18 साल लगे, मैं अन्नपूर्णा की तलहटी पर आ गया था – वहीं पर उसका आरोहण पूरा होता है, शिखर पर नहीं बल्कि तलहटी पर – मैंने जो किया था मुझे उस पर बहुत गर्व था क्योंकि यह एक निजी यात्रा थी, किसी ने मुझे इसे करने के लिए नहीं कहा था, यह एक ऐसी चीज़ थी जिसे मैं करना चाहता था। इन सभी आरोहणों ने मुझे यही सिखाया है कि कोई भी चीज़ जो असंभव या अप्राप्य प्रतीत होती है, यदि आपके पास धैर्य और जुनून हो, तो आप मन में जो भी ठान लें, उसे पूरा कर सकते हैं। मैं सच्चाई के साथ कह सकता हूँ कि यदि आप याद कर के यह कह सकते हैं कि, “मैंने अपने सपने को जिया है,” तो वह निश्चित ही एक अच्छा जीवन है।

एड विएस्टर्स की रोलेक्स घड़ी

टाइमकीपिंग अति महत्वपूर्ण है। एक अन्वेषक के लिए, आपके पास जो घड़ी होती है उसे विश्वसनीय होना चाहिए। बल्कि उसे अटूट, वॉटरप्रूफ़, शॉकप्रूफ़ और उपयोग में आसान भी होना चाहिए। चढ़ाई की योजना बनाना आरोहण का एक हिस्सा है, लेकिन मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है, नीचे उतरने की योजना बनाना। यह पता होते हुए कि मुझे कितने बजे तक वापिस पहुँचना है, मुझे यह पता होता है कि मुझे कब निकलना है, और मेरे लिए यह हमेशा मध्यरात्रि ही रहा है; और अगर मैं तब तक शिखर पर नहीं पहुँचता, तो नियम यह था कि मैं वापिस लौट आऊँ। मैं इसके प्रति बहुत, बहुत सख्त था।

“मैं सच्चाई के साथ कह सकता हूँ कि यदि आप याद कर के यह कह सकते हैं कि, “मैंने अपने सपने को जिया है,” तो वह निश्चित ही एक अच्छा जीवन है। ”

मेरे पास रोलेक्स एक्सप्लोरर II है जो मुझे 1994 में प्राप्त हुई, जब मैंने 8000-मीटर की तीन चोटियाँ चढ़ ली थी, और तभी मेरे मन में यह विचार आने लगा था कि मैं बाकी 14 भी चढ़ना चाहता हूँ। उस दिन से, मैंने हर पल अपनी एक्सप्लोरर II को पहना है, अपने प्रत्येक आरोहण में, और मैं उसे आज भी पहनता हूँ। जब मैं अन्नपूर्णा के शिखर पर पहुँचा, जो मेरी सूची का अंतिम पर्वत था, मैं शिखर पर ठीक दोपहर 2.00 बजे पहुँचा था – एक ऐसा पल जो मुझे विशेष रूप से याद है – मैं अपने उचित समय पर शिखर पर पहुँचा था और यह घड़ी तब मेरे साथ थी।



“उस दिन से, मैंने हर पल अपनी एक्सप्लोरर II को पहना है, अपने प्रत्येक आरोहण में, और मैं उसे आज भी पहनता हूँ। ”

यह घड़ी उस यात्रा की अनुस्मारक है जिस पर मैं गया था और यह मेरे साथ थी। हर वर्ष आपको एक नया उपकरण मिलता है क्योंकि वह अभिनव होता है, या फिर हल्का, या फिर बेहतर – यह एक ऐसा उपकरण है जो कभी नहीं बदला क्योंकि यह शाश्वत है, दिखावट में, कार्यात्मकता में और मुझे कभी इसे बदलने की जरूरत महसूस नहीं हुई। यह मेरे प्रत्येक आरोहण का, संभवतः सबसे महत्वपूर्ण उपकरण रहा है।

“हर वर्ष आपको एक नया उपकरण मिलता है क्योंकि वह अभिनव होता है, या फिर हल्का, या फिर बेहतर – यह एक ऐसा उपकरण है जो कभी नहीं बदला। ”

कई तरह से, मेरी एक्सप्लोरर II ने मुझे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद की है और मुझे जीवित रखा है क्योंकि पहाड़ियों पर, मैं अपने ज़्यादातर निर्णय समय के आधार पर लेता था, और समय के बिना, यानि घड़ी के बिना, मैं शायद आज यहाँ पर नहीं बैठा होता।